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Inter Hindi VVI Questions | बिहार बोर्ड हिंदी महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न बोर्ड परीक्षा |

Inter Inter Hindi VVI Questions | बिहार बोर्ड हिंदी महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न बोर्ड परीक्षा 

Bihar board Exam Important Questions

 

Q.1. मानक स्वय को वहशी और जानवर से बढ़कर क्यों कहता है?
उत्तर: ‘‘सिपाही की मां‘‘ शीर्षक एकांकी में मानक एक फौजी है। वह वर्मा मैं हिंदुस्तानी फौजी ओर से जापानी सेना से युद्ध कर रहा है मानक और दुश्मन सिपाही एक दूसरे को घायल करते हैं ।

मानक भागता हुआ अपनी मां के पास आता है ,और दुश्मन सिपाही उसका पीछा करते हुए वहां पहुंच जाता है ,मानक की मां मानक को बचाना चाहती है। इस पर दुश्मन सिपाही मानक को वहशी और जानवर कहकर पुकारता है मानक का पुरुष जाग उठता है, तो घायल अवस्था में भी वह खड़ा होकर सिपाही को मारने का प्रयास करता है।

और क्रोध की स्थिति में वह स्वय को वहशी और जानवर से भी बढ़कर कहता है, मानक का ऐसा कहना अतिशयोक्ति नहीं है। समय और परिस्थिति के अनुसार उसका यह कहना यथार्थ है दर्शकों की नजर में मानक की उक्त प्रभाव कारी एवं आकर्षक है।

Q.2. बशनी और मुन्नी को किसकी प्रतीक्षा है?वे डाकिए की राह क्यों देखती हैं।
उत्तर: बशनी को अपनी सिपाही पुत्र एवं मुन्नी को सिपाही भाई की प्रतीक्षा वे डाकिए की चिट्ठी आने को देखती है क्योंकि उसने पिछली चिट्ठी में लिखा था । बे वर्मा की लड़ाई पर जा रहे हैं मां और बेटी किसी अनिस्ट कि सनका के कारण चिट्ठी का इंतजार करते हैं ।

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Q.3. ‘ उसने कहा था’ कहानी का केंद्रीय भाव क्या है?
उत्तर: ‘उसने कहा था’ प्रथम विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि मे लिखी गई कहानी । गेलेरी जी ने लाना सिंह और सूबेदारनी के माध्यम से मानवीय संबंधो का नया रूप प्रस्तुत किया है। लहना सिंह और सूबेदारनी के अपने प्रति विश्वास से अभिभूत होता है, क्योंकि उस विश्वास की नीव में बचपन के संबंध है। सूबेदारनी का विश्वास ही लहना सिंह को उस महान त्याग की प्रेरणा देता है।

Q.4. जहां भय है। वहां मेधा नहीं हो सकती । क्यों?
उत्तर: मेधा वह सकती है, जिससे मनुष्य सिद्धांतो की अनुपस्थिति में भी निर्भयता पूर्वक सोचता है। ताकि वह सत्य और यथार्थ को समझ सके यदि मनुष्य भयभीत रहता है , तो कभी मेधावी नहीं हो सकेगा किसी प्रकार की महत्वकांशा चाहे अध्यात्मक हो या संसारीक चिंता और भय का निर्माण करती है , जबकि ठीक इसके विपरीत निर्भीक वातावरण में मेधा का जन्म होता है इसलिए जहां भय हैं वहां मेधा नहीं वो सकती।

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Q.5. ‘धरती का क्षण ’ से क्या आशय है?
उत्तर: लेखक कविता के मूड में जब डायरी लिखते हैं तो शब्द और अर्थ के मध की दूरी अनिर्धारीत हो जाती है । सब्द अर्थ में बदलते चले जाते है ,एक दूसरे को पकड़ते — छोड़ते हुए । सब्द् और अर्थ का जब साथ नही होता है । तो वह आकाश होता है तो वह धरती का क्षण होता है , और उसमे रचनाएं जड़ पा लेती है प्रस्फुटन का आदि श्रोत पा जाती हैं अत: यह कहना उचित है की शब्द और अर्थ एक दूसरे के पूरक हैं।

Q.6: तुलसी सीता ने कैसी सहायता चाहते हैं ?
उत्तर: तुलसी और सीता से वचनों से ही सहायता मांगते हैं अथार्त बानी की सहायता मांगते हैं सीता माता से वे कहते हैं कि प्रभु मेरा नाम दशा पूछे तो बता देना कि मैं दिन हीन निर्मल हूं और उन्हीं का नाम लेकर अपना पेट भरता हूं।

Q. 7. छात्र साल की तलवार कैसी है? मार्क वर्णन कीजिए।

उत्तर : प्रस्तुत कविता में महाराजा छत्रसाल की तलवार के बयान करता काश चित्रण हुआ है उनकी तलवार सूर्य के किरणों के समान प्रखर और प्रचंड है उनकी तलवार की भयंकरता से शत्रु दल उठता है उनकी तलवार में पार्ल्यकारी सूर्य की किरणे की तरह म्यान से निकलते है यदि विशाल हथिया के झुंड को क्षणभर में काट काटकर समाप्त कर देती है हाथीथों का झुंड गहन अंधकार की तरह प्रतीत होता है जिस प्रकार सूर्य किरण समझ अंधकार का सामराज्य समाप्त हो जाता है कि ठीक उसी प्रकार तलवार के तेज के आगे अंधकार रुपी हाथियों का स्तंभ मृत्यु को प्राप्त करता है।

छात्र साला की तलवार एसी नागिन की तरह है जो शत्रुओं के गले में लिप्त जाती है और मुंडो की भीड़ लगा देती है लगता है कि रुद्र देव को रिझाने के लिए ऐसा कर रहे हैं।

महाकवि भूषण छात्र साल की वीरता धीरता से मुग्ध होकर कहते हैं कि हे बलिष्ठ और विशाल भुजा वाले महाराजा छात्र साल मैं आपकी तलवार का गुणगान कहां तक करूं आपकी तलवार शत्रु योद्धाओं के कटक जाल को काट काटकर रंग चंडी की तरहनिकाल कारी भर्ती हुई काल को भोजन कर आती है।

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Q. 8. मां के लिए अपना मन समझाना कब कठिन है और क्यों?

उत्तर: मां के लिए अपने मन को समझाना तब कठिन हो जाता है जगवा अपना बेटा खो देती है। बेटा मां की अमूल्य धरोहर होता है। मां की आंखों का तारा होता है मां का सर्वस्व यदि कुर नीती द्वारा उससे छिन लिया जाता है, उसके बेटे की मिर्तू हो जाती है तो मां के लिए अपने मन को समझाना वोट समाई के लिए बहुत ज्यादा कठिन होता है।

Q. 9. चंपारण में शिक्षा की व्यवस्था के लिए गांधीजी ने क्या किया?
उत्तर: चंपारण में नील की खेती करने वाले किसानो पर जो तरह-तरह की अत्याचार हो रहे थे, उसको दूर करने में गांधीजी की भूमिका पूर्व रूप से आलोकित होती है। गां

जी ने इस स्थिति का अच्छी तरह से जायजा लिया और विचार व्यक्त किया कि जब तक यहां की शिक्षा व्यवस्था ठीक नहीं होगी तब तक अत्याचार की समस्या का समाधान नहीं होगा, उन्होंने चंपारण में शिक्षा की व्यवस्था मजबूत हो इसके लिए कुछ ग्रामीण विद्यालयों की स्थापना करवाई ।

थोड़ी दिन के बाद उन्होंने 3 गांव में आश्रम विद्यालय स्थापित किए बरहरवा , मधुवन और भित्ति हरवा कुछ निष्ठावान कार्यकर्ताओं को तीनो गांव में तैनात किया बरहरवा कि विद्यालय को विदेश में शिक्षा प्राप्त इंजीनियर, श्री बदनजी गोखले और विदुसी पत्नी अब्तिका बाई गोखले ने चलाया इस प्रकार गांधी जी के द्वारा चंपारण में शिक्षा की व्यवस्था की गई ।

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Q.10. शिक्षा का अर्थ है ?
उत्तर: शिक्षा का अर्थ जीवन के सत्य से परिचित होना और संपूर्ण जीवन की प्रक्रिया को समझाने में हमारी मदद करना है क्योंकि जीवन विलक्षण है ये पक्षी ये फुले ये बैभवशाली वृक्ष यह आसमान ये सितारे ये मत्स्य सब हमारा जीवन है।

जीदिन है जीवन अमीर थी। जीवन गुट है जीवन मंकी प्रसन्न बस हुए इच्छाएं महत्वाकांक्षाएं बसना भया सफलताएं एवं चिंताएं केवल इतना ही नहीं अपितु इससे कह ज्यादा जीवन है हम कुछ परीक्षाएं उत्तीर्ण कर लेते हैं हम विवाह कर लेते हैं बच्चे पैदा कर लेते हैं और इस प्रकार अधिकाधिक यंत्रवत बन जाते है।

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